कृत्रिम वर्षा (Artificial Rain) – विस्तृत एवं वैज्ञानिक अध्ययन
1. परिभाषा (Definition)
कृत्रिम वर्षा वह तकनीक है, जिसमें वातावरण में
मौजूद बादलों को रासायनिक या भौतिक तरीकों से इस प्रकार परिवर्तित किया जाता है कि वे संघनित होकर वर्षा, हिमपात या ओलावृष्टि करें।
इसे सामान्यतः Cloud Seeding कहा जाता है।
2. प्राकृतिक वर्षा का सिद्धांत (Principle of Natural Rainfall)
प्राकृतिक वर्षा तब होती है जब:
1. सूर्य की ऊष्मा से जल वाष्पित होकर वायुमंडल में ऊपर उठता है।
2. ऊँचाई पर ठंडी हवा के संपर्क में आकर जलवाष्प संघनित होकर जलकण या हिमकण बनाते हैं।
3. जब ये जलकण आपस में मिलकर बड़े हो जाते हैं तो गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे गिरते हैं। लेकिन कई बार बादलों में जलवाष्प मौजूद होने पर भी जलकण इतने बड़े नहीं होते कि वर्षा हो सके—यहीं कृत्रिम वर्षा तकनीक काम आती है।
3. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
1946 – अमेरिका में Vincent J. Schaefer ने Dry Ice (ठोस CO₂) का उपयोग कर पहला सफल प्रयोग किया।
उसी वर्ष Bernard Vonnegut ने Silver Iodide को सीडिंग एजेंट के रूप में इस्तेमाल किया।
1960–70 के दशक में अमेरिका, रूस और चीन ने बड़े पैमाने पर प्रयोग किए।
भारत में 1980 के दशक में इस तकनीक का परीक्षण शुरू हुआ।
4. कृत्रिम वर्षा का वैज्ञानिक सिद्धांत (Scientific Principle)
Cloud Seeding में ऐसे Nucleating Agents बादलों में छोड़े जाते हैं जो जलवाष्प को संघनित करने के लिए नाभिक (nucleus) प्रदान करते हैं।
Silver Iodide (AgI) का क्रिस्टल संरचना बर्फ के समान होती है, जो बर्फ कणों के बनने में मदद करता है।
Sodium Chloride (NaCl) नमक की तरह जलकणों को संघनित करता है।
Dry Ice (CO₂) ठंडा वातावरण बनाकर जलकणों को जमाता है।
5. कृत्रिम वर्षा की विधियाँ (Methods of Artificial Rain)
हवाई जहाज से बादलों में सीधे केमिकल का छिड़काव।
बड़े क्षेत्र में काम करने के लिए उपयुक्त।
जमीन पर स्थित मशीनें Silver Iodide का धुआँ छोड़ती हैं, जो हवा के साथ ऊपर जाकर बादलों में पहुँचता है।
(C) Rocket or Artillery Method
रॉकेट/तोप के गोले में केमिकल भरकर बादलों तक पहुँचाना।
पर्वतीय या कठिन इलाकों में उपयोगी।
6. प्रकार (Types of Cloud Seeding)
1. Static Cloud Seeding – बादलों में रासायनिक कण डालकर जलकणों का आकार बढ़ाना।
2. Dynamic Cloud Seeding – बादलों की ऊर्ध्वाधर गति को बढ़ाकर अधिक वर्षा कराना।
3. Hygroscopic Cloud Seeding – नमक जैसे पदार्थों से बड़े जलकण बनाना।
7. उपयोग (Applications)
सूखा राहत (Drought Mitigation)
कृषि सिंचाई
जलाशयों में पानी भरना
प्रदूषण नियंत्रण
ओलावृष्टि नियंत्रण (hail suppression)
बर्फबारी बढ़ाना (स्की रिसॉर्ट्स के लिए)
8. लाभ (Advantages)
वर्षा की मात्रा बढ़ाकर पानी की कमी दूर करना।
फसल उत्पादन में वृद्धि।
पर्यावरण में नमी बनाए रखना।
वायु प्रदूषण में कमी।
9. सीमाएँ (Limitations)
बादलों का मौजूद होना आवश्यक।
100% सफलता की गारंटी नहीं।
लागत बहुत अधिक।
मौसम की अनिश्चितता।
10. पर्यावरणीय प्रभाव (Environmental Impacts)
Silver Iodide का अत्यधिक प्रयोग मिट्टी और जल प्रदूषण बढ़ा सकता है।
पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) पर दीर्घकालिक प्रभाव पूरी तरह ज्ञात नहीं।
रासायनिक अवशेष जल जीवों और पौधों पर असर डाल सकते हैं।
11. भारत में कृत्रिम वर्षा (Artificial Rain in India)
महाराष्ट्र और कर्नाटक – सूखा प्रभावित इलाकों में।
तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश – जलाशयों में पानी बढ़ाने हेतु।
राजस्थान – मरुस्थलीकरण कम करने और जल संग्रहण बढ़ाने के लिए।
12. निष्कर्ष (Conclusion)
कृत्रिम वर्षा एक उन्नत मौसम संशोधन तकनीक है जो जल संकट और कृषि समस्याओं के समाधान में मदद कर सकती है, लेकिन यह महंगी, सीमित और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील तकनीक है। इसका जिम्मेदारीपूर्वक और वैज्ञानिक तरीके से उपयोग ही स्थायी समाधान प्रदान कर सकता है।
By :- B.K. SAMOTYA SIR
(BIOMETRA.BLOGSPOT.COM )


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